
22 जुलाई 2026, देहरादून
20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर से संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे छात्रों, युवाओं एवं नागरिकों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) उत्तराखंड राज्य समिति द्वारा देहरादून में गांधी पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल विरोध मार्च एवं प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में विभिन्न सीटू, जनवादी महिला समिति, छात्र, युवा एवं जनसंगठनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्रों, युवाओं और नागरिकों ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी लोकतांत्रिक मांगों को रखने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज करना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सीधा हमला है। वक्ताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज़ को दमन और हिंसा के माध्यम से दबाने का प्रयास लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मार्च के उपरांत प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी, देहरादून के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, भारत गणराज्य के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं-
• संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज एवं बलप्रयोग के आदेश देने वाले अधिकारियों तथा प्रत्यक्ष दोषियों के विरुद्ध स्वतंत्र न्यायिक जांच कर उन्हें शीघ्र दंडित किया जाए।
• शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा दें।
• लाठीचार्ज में घायल छात्रों, पत्रकारों एवं नागरिकों को समुचित आर्थिक सहायता तथा निःशुल्क उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
प्रदर्शनकारियों में एस.एफ.आई. के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि पुलिस द्वारा भाजपा सरकार के इशारे पर साजिशन दिल्ली में पुलिस द्वारा प्रदर्शन को खराब किया गया, सीटू सचिव साथी लेखराज जी ने कहा कि यह तानाशी सरकार के एजेंडे में सिर्फ लूट और भ्रष्टाचार है इसका खत्म होना जरूरी है, पंकज क्षेत्री जी ने कहा कि समस्त विपक्षी ताकतों को एकजुट होकर भाजपा सरकार का विरोध करना होगा, एस एफ आई जिला सचिव अयाज खान ने कहा कि सरकार के मन में चोर है पहले इनकी अकुशलता के कारण पहले छात्रों द्वारा आत्महत्या की गई बाद में इन्होंने छात्रों को साजिशन पिटवाया।
साथी मुकुल ने कहा कि देश के छात्र बेहतर और समान शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं तथा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं। उनकी इन जायज़ मांगों का उत्तर लाठियों और दमन से देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
प्रदर्शन में सुहाना, कनिका कार्तिक , प्रियंका, अफसाना, अशफाक, समीर आयुष, एस एफ आई राज्य सचिव शैलेंद्र परमार, मानवी अभिषेक, आकाश, जसविंदर , पीयूष, अंजली सीटू से अभिषेक भंडारी,हिमांशु चौहान,भगवंत सिंह पयाल, अनीता रावत, कुसुम नौडियाल एस. एस. नेगी , बस्ती बचाओ आंदोलन से अनंत आकाश, महिला समिति से नूरेशा अंसारी अभिनेत्री बबिता अनंत, अंजली सेमवाल (पूर्व सहसचिव डी ए वी), आदि सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शन मौजूद रहे।
सभा के अंत में चेतावनी दी गई कि यदि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और छात्रों की लोकतांत्रिक मांगों की अनदेखी जारी रही, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और प्रशासन की होगी।



